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प्रेम, यादों और जीवन की अनकही दास्तान

प्रेम, यादों और जीवन की अनकही दास्तान

Kapil Kapoor
Kapil Kumar जीवन की अनकही दास्तान

कपिल कपूर की इन कविताओं में मानवीय अनुभवों का गहरा चित्रण है। गलतियों को स्वीकार करने से लेकर प्रेम के दर्द और अधूरी कहानियों तक, ये पंक्तियाँ जीवन के यथार्थ और भावनाओं की गहराई को खूबसूरती से बयां करती हैं।

1.

“उसके मुस्कुराते हुए लफ़्ज़ों को समेटते समेटते…
खिलखिलाती हुई खामोशियां वहीं भूल आया मैं!!

रौशन रातों और चौदहवीं के चांदो में…
सितारों की गिनतियां वहीं भूल आया मैं!!

पायल की झनकार तो ले आया तन्हाइयों के लिए…
चूड़ियों वाली कलाइयां वहीं भूल आया मैं!!

खुशियां ही समेटते रहा अपने ग़मों के लिए..
ज़िन्दगी वाली कहानियां वहीं भूल आया मैं!!”

 

2.

“मेरा बुत लोहे का बनवाना

मुझे फूलों से ज्यादा पत्थरों की उम्मीद है!”

 

3.

“मेरे इश्क़ में जन्नत और दोज़क की कहानी कुछ यूं है कि…

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मैने जन्नत को ढूंढा और दोज़क ने मुझे!!”

 

4.

“गलतियां तो होंगी ही..
कुछ माफ़ करने लायक.
और कुछ की सज़ा मिलेगी..
पर गलतियां तो होंगी ही..

मैं गलतियां ना करने की ग़लती नहीं करूंगा..
गलतियों में खामख्वाह इज़ाफा नहीं करूंगा..

क्यों कि…
गलतियां तो होंगी ही!”

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